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*संवरें एतिहासिक, पौराणिक धरोहर तो बदल जाएगी जिले की तस्वीर*

*संवरें एतिहासिक, पौराणिक धरोहर तो बदल जाएगी जिले की तस्वीर*

*सोनभद्र* । ऐतिहासिक, पौराणिक, लोकगाथा से जुड़े धरोहरों को पर्यटन की दृष्टि से संवारा जाए तो न सिर्फ जिले की तस्वीर बदल जाएगी बल्कि युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। सलखन स्थित अजूबा फासिल्स, विजयगढ़ दुर्ग, लोरिक-मंजरी की अमर प्रेमगाथा का साक्षी अगोरी दुर्ग, प्रागैतिहासिक कालीन सभ्यता को प्रदर्शन करने वाले गुफाचित्र, महुअरिया की इको वैली, ब्लैक बक घाटी और महामंगलेश्वर धाम लोगों के आकर्षण और आस्था का केंद्र है।
सलखन के फासिल्स से शुरू होकर पंचमुखी महादेव, विजयगढ़ दुर्ग, महामछंदरनाथ गुफा होते हुए महामंगलेश्वर तक, कंडाकोट महोदव से बरैला महादेव, गौरीशंकर महादेव, शाहगंज इलाके के महुअरिया स्थित ब्लैक बकघाटी, शिवद्वार धाम, बरकन्हरा, मुक्खादरी तक, नलराजा महोदव से होते नगवां इलाके के विभिन्न स्थलों से होकर सीमावर्ती झारखंड स्थित गुप्तेश्वर गुफा के पथ से जोड़ने को लेकर कई बार आवाज उठी। विजयगढ़ दुर्ग, मारकुंडी घाटी स्थित वीर लोरिक पत्थर, इको प्वाइंट, सलखन फासिल्स की तस्वीर संवारने को बीच-बीच में प्रयास भी हुए। अनपरा इलाके के बेलवादह के पास रिहंद जलाशय में तैरते हुए रेस्तरां, पिपरी के पास तुर्रा स्थित रिहंद बांध के रिजर्व वायर इलाके में मीन मनोरंजन को लेकर भी योजना बनी लेकिन मीन मनोरंजन, तैरते रेस्तरां की पहल ने जहां प्राथमिक स्तर पर ही दम तोड़ दिया। वहीं अगोरी दुर्ग का ज्यादातर हिस्सा जमींदोज हो चुका है।
पुरातात्विक महत्व की धरोहर घोषित होने के बावजूद विजयगढ़ दुर्ग का कोई पुरसाहाल नहीं है। पंचमुखी, कंडाकोट स्थित प्रागैतिहासिक गुफाचित्र धीरे-धीरे नष्ट होते जा रहे हैं। फासिल्स पर पूर्व की सपा सरकार में काम हुआ। लोहे की जाली, गेट आदि भी लगाए गए लेकिन ज्यादातर लोहे की जालियां चोरों की भेंट चढ़ गई। महामंगलेश्वर धाम जहां, एडवेंचर की असीम संभावनाएं हैं, वहां जाने के लिए एक सुगम मार्ग पर तक उपलब्ध नहीं हो सका है। गोरख पीठ से जुड़ाव रखने वाली मछंदरनाथ गुफा की यात्रा के लिए भी कई बार सोचना पड़ता है।,,जूही खान,,की रिपोर्ट

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