उत्तर प्रदेशसोनभद्र

डाला के बॉडी स्थित पहले से हुए खनन क्षेत्र में शोध करने पहुंची

तीन सदस्यीय वैज्ञानिक ‘जी’ टीम रविवार को डाला के बॉडी खनन क्षेत्रो का शोध करने पहुंची टीम..जीवाश्म 2 मीटर की लेयर में लगभग 174 करोड़ वर्ष पूराने दिखें

जनपद में 25 जनवरी से 3 फरवरी तक करेंगी शोध

अभी तक लगभग 45 पैकेट टेस्ट हेतु लखनऊ भेजने के लिए तैयार किया जा चुका

– भूवैज्ञानिकों की एक समिति बनाई जाएगी समिति में अधिकारी वर्ग ,वैज्ञनिक वर्ग ,व पत्रकार भी होंगे शामिल
डाला सोनभद्र
अनिल जायसवाल
संवाददाता

डाला सोनभद्र- जनपद में 25 जनवरी 2021 से तीन सदस्यीय वैज्ञानिक ‘जी’ टीम रविवार को डाला के बॉडी स्थित पहले से हुए खनन क्षेत्र में शोध करने पहुंची। जहां बीएचयू से पीएचडी कर रहें दिव्या सिंह व प्रड्यूमन सिंह को अनमोल धरोहर दिखाते हुए स्टोन लाइट जीवाश्म के सम्बंध में बताया।
डाला के बॉडी स्थित पहाड़ियों में सलखन से भी पुराना जीवाश्म पाए गए । सलखन का फासिल्स लगभग 160 करोड़ वर्ष पुराना है, वही डाला बॉडी में मिले जीवाश्म 2 मीटर की लेयर में लगभग 174 करोड़ वर्ष पूराने है । इसके अलावा जिले में शोध के लिए टीम ग्राम पंचायत कोटा के कोटा खास, ओबरा, चोपन, सलखन में देखते हुए अभी तक लगभग 45 पैकेट टेस्ट हेतु लखनऊ भेजने के लिए तैयार हो गया है जिसमे शोध में आये दिव्या सिंह व प्रड्यूमन सिंह इस पर पीएचडी करेंगे व मैं शोध करते हुते शोध पत्र लिखूंगा । यहां पर तीन प्रकार के लेयर पाए जा रहे है। जिसका संरचनात्मक जांच किया जा रहा है। ये जीवाश्म उस समय के है जब पृथ्वी पर जीवन नही हुआ करता था , केवल वन ही वन पाए जाते थे। यहां आने के उद्देश्य में बातये की इस पर एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार होगा व प्रदेश सरकार को दिया जाएगा । जिससे क्षेत्र को अच्छा बनाया जा सके, यहां के लोग इसे अच्छे से समझ सकें। और कहां-कहां पर इस तरह का जीवाश्म है। इसका अध्ययन करने के लिए जिले में जल्द ही भूवैज्ञानिकों की एक समिति बनाई जाएगी । समिति में अधिकारी वर्ग , वैज्ञनिक वर्ग ,व पत्रकार भी रहेंगे। समिति के लोग जगह-जगह जांच भी करेंगे
भूवैज्ञानिक मुकुंद शर्मा के नेतृत्व में आई शोध टीम जिले में 25 जनवरी से 3 फरवरी तक शोध करेगी । जिले में लगभग एक सप्ताह के दौरे पर आए भूवैज्ञानिक मुकुंद शर्मा ने बताया कि सन 2000 से मैं सोनभद्र आया करता हूँ। ताकि शोध से पर्यावरण को भी नुकसान ना हो और प्राकृतिक संसाधनों का देश हित में उपयोग भी किया जा सके। कुछ अन्य स्थलों पर भी जीवाश्म होने का अनुमान है। इन्हीं सबका अध्ययन करने के लिए भूवैज्ञानिकों की शोध टीम काम कर रही है। व लंबे समय से फासिल्स पर काम कर रहे लेखक ‘फासिल्स’ सनोज तिवारी ने वैज्ञानिक टीम को क्षेत्र में प्वाइंट पर जा करके दिखाया व प्रकृति और उसके आयु के बारे में विस्तार से बताया।

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