उत्तर प्रदेश

गैंग लीडर सुरेंद्र यादव को 10 वर्ष की कैद

– 10 हजार रुपये अर्थदंड, न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद
– जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित रहेगी
सोनभद्र(राजेश)न्यायाधीश एफटीसी/ विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर आसुतोष कुमार सिंह की अदालत ने गैंगेस्टर एक्ट के मामले में सोमवार को सुनवाई करते हुए गैंग लीडर सुरेंद्र यादव को दोषसिद्ध पाकर 10 वर्ष की कैद एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। वहीं जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित रहेगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 28 जून 2009 को मांची एसओ देखभाल क्षेत्र एवं वांछित अभियुक्तों की तलाश में पुलिस बल के साथ क्षेत्र में निकले थे कि तभी पता चला कि यहां पर एक सक्रिय गिरोह कार्य कर रहा है। जिसका गैंग लीडर बिहार प्रान्त के भभुआ कैमूर जिला के अधौरा थाना क्षेत्र के कुरुआसोत निवासी सुरेंद्र यादव है। यह अपने गिरोह के सदस्यों के लाभ के लिए कार्य करता है। इस गिरोह का बोलबाला है। इनके विरुद्ध कोई भी शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। इनके ऊपर चोरी, लूट,अपहरण जैसे कई संगीन मामले हैं। विवेचक ने एसपी एवं डीएम से गैंग चार्ट अनुमोदन कराकर न्यायालय में दाखिल किया था। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषी सुरेंद्र यादव को दोषसिद्ध पाकर 10 वर्ष की कैद एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित की जाएगी। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता धनन्जय शुक्ला ने बहस की।

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इनसेट में-

4 वर्ष 9 माह की कैद
सोनभद्र। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/ विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर आसुतोष कुमार सिंह की अदालत ने गैंगेस्टर एक्ट के दूसरे मामले में भी सोमवार को दोषसिद्ध पाकर दोषी सुरेंद्र यादव को 4 वर्ष 9 माह की कैद एवं 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर 10 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक रायपुर एसओ 13 जून 2010 को पुलिस बल के साथ देखभाल क्षेत्र में निकले थे तभी पता चला कि एक गैंग कार्य कर रहा है। जिसका गैंग लीडर सुरेंद्र यादव है। इसके ऊपर हत्या, अपहरण, चोरी जैसे संगीन अपराध करने का मुकदमा दर्ज है। सुनवाई करते हुए अदालत ने दोषसिद्ध पाकर दोषी सुरेंद्र यादव को उपरोक्त सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता धनन्जय शुक्ला ने बहस की।

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