उत्तर प्रदेशसोनभद्र

रेलवे रैक बिल्ली से गिट्टी का अवैध खनन की आशंका में डीएम ने गठित की आठ सदस्यीय जांच टीम

 

सोनभद्र: जिले में खनन माफियाओं की एक और कारस्तानी सामने आई है। अवैध खनन कर निकाली गई गिट्टी को रेलवे रैक के जरिए दूरदराज के क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। इस बात के सामने आने पर जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने तत्काल ओबरा एसडीएम को मौके पर भेजकर भंडारण की गई गिट्टी की नाप व जांच करवाई तो पता चला कि जरूरत से ज्यादा व बगैर परमिट व रॉयल्टी के ही गिट्टी का भंडारण किया गया है और रेलवे रैक के माध्यम से इसका परिवहन किया जा रहा है।
इस मामले के सामने आने पर डीएम अभिषेक सिंह ने बिल्ली के स्टेशन मास्टर को पत्र लिखकर इस पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया है। उधर, चोपन में रेलवे के दोहरीकरण कार्य में भी अवैध खनन की गिट्टी बालू के इस्तेमाल पर जांच कमेटी गठित की गई है।
*माल को ट्रकों के जरिए बाहर भेजने की व्‍यवस्‍था*
वहीं, ओबरा तहसील अंतर्गत खनन क्षेत्र बिल्ली मारकुंडी में डोलो स्टोन की निकासी होती है। क्रेशर प्लांटों से माल लाकर इसे ट्रकों के जरिए बाहर भेजने की व्यवस्था है। इसके लिए रॉयल्टी और परमिट का प्रावधान है। बिना रॉयल्टी चुकाए ही अवैध खनन और परिवहन से राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। इस बीच रेलवे ट्रैक से अवैध खनन की बात सामने आने से अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं।
दरअसल, 7 अक्टूबर को निरीक्षण के दौरान दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास लाइन नंबर एक पर 2500 व लाइन नंबर पांच पर 500 घन मीटर गिट्टी का भंडारण पाया गया था। इसकी छानबीन शुरू हुई तो बिल्ली के स्टेशन मास्टर ने बताया कि, इस गिट्टी का परिवहन रेलवे रैक के माध्यम से अन्य स्थानों के लिए किया जाता है। भंडारित गिट्टी से संबंधित कोई वैध प्रपत्र उपलब्ध नहीं कराया गया। रेलवे में माल भेजने और भंडारण करने वालों के संबंध में भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इस पर डीएम ने इसे गंभीरता से लिया और बिल्ली के स्टेशन मास्टर को पत्र लिखकर बिना लोडिंग की अनुमति प्राप्त किए रेलवे ट्रैक से गिट्टी का परिवहन की किसी भी हाल में ना होने देने का निर्देश दिया है।

*आठ सदस्‍यीय समिति गठित, अधिकारी बोलने को तैयार नहीं*

इसके अलावा जिलाधिकारी ने अप्रैल से सितंबर तक रेलवे रैक से खनिज पदार्थ के परिवहन की रिपोर्ट तिथि वार मांगी है। वहीं, ईस्ट सेंट्रल रेलवे रेणुकूट और चोपन की ओर से कराए जा रहे रेलवे दोहरीकरण कार्य में प्रयोग किए जा रहे खनिज की मात्रा की जांच भी डीएम के आदेश के द्वारा शुरू हो गई है। एसडीएम की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति गठित की गई है। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर ना तो रेलवे का कोई भी अधिकारी और ना ही जांच कर रहे एसडीएम व जांच देने का आदेश देने वाले डीएम कुछ भी बोलने को तैयार हुए हैं।एसडीएम के आदेश पर तहसीलदार पहुंचे जांच करने।

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