सोनभद्र

पंचायत के नालें में कूड़ा बीनकर बचपन खोजते गरीब नौनिहाल जिनके हाथों में पेन और किताब होना चाहिए।

पंचायत के नालें में कूड़ा बीनकर बचपन खोजते गरीब नौनिहाल जिनके हाथों में पेन और किताब होना चाहिए।

दोषी कौन माता-पिता या जिला बाल कल्याण विभाग या शासन के वित्तीय मदद से संचालित होने वाली बाल कल्याण संस्थाए।

क्या यहीं हैं लालबहादुर शास्त्री, गांधी,सुभाषचंद्र बोस,वल्लभ भाई चन्द्रशेखर आज़ाद, के सपनों का भारत।
अशोक मद्धेशिया
संवाददाता
चोपन/सोनभद्र। इन दिनों पूरे नगर के कोने-कोने में कबाड़ बीनने वाले और भीख मांगने वाले नाबालिग बच्चे नगर के कोने-कोने में देखे जा सकते हैं सर्वप्रथम इसके लिए दोषी इनके गैर जिम्मेदार माता-पिता है और बाल श्रम विभाग जो अपने नैतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करते हैं। आज सुबह लगभग साढ़े दस बजे दो बच्चे पंचायत के नाले घुसकर कूड़ा बीन रहें थे हमने उनसे पूछा क्या कर रहें हों दोनों लोग नाले घुसकर बोले कूड़ा बीन रहें हम बोले पढ़ने नहीं जाते हो क्या तुम लोग वो बोले नहीं हमने कहा काहे वो बोले मम्मी पापा नहीं भेजते हैं हमने पूछा क्या नाम हैं मम्मी-पापा और तुम लोगों पहले तो कुछ बताने से बच रहें बाद में पापा का नाम शिव और अपना नाम शिवा,शायर बताएं इसके बाद कहने लगे अंकल जी अब नहीं आएंगे और कल से स्कूल जाएंगे लेकिन उनकी बातों से लग रहा था कि वो डर से बोल रहें हैं और नाले से निकलकर दोनों बच्चे चले गए।
आजादी का लगभग (74) वा वर्ष चल रहा हैं, लेकिन देश के बदहाली वाली सुरतेहाल अभी तक पूर्ण रूप से नहीं बदली। जिसके लिए लोकप्रिय प्रधानमंत्री के आहवान पर पूरे देश आजादी का जगह- जगह ओर सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों द्वारा अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है।
सूत्रों की माने तो चोपन से सटे गांव पटवध और मध्य प्रदेश ट्रेन से बहुत सारे भिक्षा मांगने वाले भिक्षु परिवार और बच्चों सहित भारी संख्या में प्रतिदिन भीक्षा मांगने आते हैं और अपने बच्चों मांगने और कूड़ा बीनने में लगाकर अपने दूर से देखते रहते और शाम होते ही या तो घर चले जाते हैं या रेलवे रामलीला मैदान खाना बनाकर खाते हैं इन‌ बच्चों के माता-पिता की ओछी मानसिकता से ऐ बच्चे बदहाली जीवन जीने पर मजबूर हैं जो देश और समाज के लिए बदनूमा दाग हैं। जैसे ही बस स्टैंड या होटलों के सामने बड़ी या छोटी वाहन आकर खड़ा होता हैं वैसे ही ऐ बच्चे चार पांच की संख्या एकत्र होकर मांगने लगते हैं जिससे यात्रा करने वाले राहगीर और मार्केट के दुकानदार परेशान हो जाते हैं ऐ बच्चे इतने ट्रेंड होते हैं कि बिना भीक्षा लिए पीछा नहीं छोड़ते हैं।
स्थानीय सम्भ्रांत निवासियों ने बाल श्रम कल्याण विभाग का ध्यान आकर्षित कराते हुए मांग कियाकि इन बच्चों के कार्य पर निगरानी करते हुए इनको सही स्थान पर पहुंचाया जाए और इनके पठन-पाठन की शासन द्वारा आई सुविधा को मुहैया कराते हुए समाज की मुख्य धारा में जोड़ा जाए जो देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का सपना हैं जो मूल-मंत्र सबका साथ सबका विकास तभी देश की सूरत बदलेगी।

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