उत्तर प्रदेश

पत्रकारिता के लीजेंड बन चुके हैं चाचा मिथिलेश द्विवेदी

पत्रकारिता के लीजेंड बन चुके हैं चाचा मिथिलेश द्विवेदी

सोनभद्र ब्यूरो::अजीब शस है दुनियां को कुछ पता ही नहीं, ख्याल नेक,अमल जोगियों के ध्यान सा है। मैं जिस अजीम कलमकार की बात कर रहा हूँ वह जनपद के सबसे फिट और हैंडसम आज भी उतने ही हैं जितने जवानी के दिनों में दिखते थे। अपनी सादगी, सरलता ,सहजता और साफ सुथरी पत्रकारिता से लिजेण्ड बन चुके मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी की लिखी स्टोरी दिल को छूती ही नहीं, दिल में उतर जाती है। इनका मिजाज सूफियाना है, इनका गम अपना न होकर जमाने का दर्द बनकर अखबार के पन्ने पर उतरता है तो हुक्मरानों की बन्द पलकें खुलने में तनिक भी कोताही नहीं कर पाती। आम लोगांे के मसले उठाते हुए कब सधी हुई टिप्पड़ी से पते की बात कह जाते हैं कायदे से समझने पर समझ में आता है।

 यह सब मैं किस आधार से कह रहा हूँ, ऐसा सोचना आप का बनता है जी। दरअसल वाराणसी से प्रकाशित ‘आज’ अखबार में मैं इनके मार्गदर्शन में फीचर, गाँव गिराव, सरोकार, क्या कहते हैं आपके अधिकारी, अतीत के आईने में, सियासत नामा, ब्यक्तित्व आदि पर लिखता था। मुझे इंट्रो लिखने तब भी नहीं आता था और आज भी वहीँ है। आप यकीन मानिए बिना कुछ कहे श्री द्विवेदी जी री-राइट करके मेरे नाम से भेज देते थे। हर समाचार का इंट्रो लिखते थे लेकिन न कभी गुस्सा हुए नहीं कभी यह साबित होने दिया कि भोला तुम्हें इंट्रो लिखने नहीं आता। खूब सुरती में 72 साल के बाद भी कोई इतना चुस्त दुरुस्त और ड्रेसिंग हो तो कहिए। अनुशासन में नम्बर वन रहकर श्री द्विवेदी अपने आचरण से हम सबको सन्देश देते रहे और आज भी युवा पत्रकारों को देते हैं। मेरे पत्रकारिता के गुरु महाबीर प्रसाद जालान जब भी दफ्तर में कदम रखते थे, सबसे पहले भाई साहब मिथिलेश जी ही खड़े होकर अभिवादन करते थे तब हम सभी भी उनके इस आचरण का अनुश्रवण करते थे और भी करते चले आ रहे हैं। प्रखर पत्रकार मिथिलेश जी की उम्र थोड़ी और ज्यादा रही होती तो मेरे पिताजी के तरह होते। फिलहाल मैं अपनी बात को इस मुकाम पर यह कहते हुए विराम दे रहा हूँ कि

खुली जमीन खुला आसमान रखता है,

     फकीर है ए मुकम्मल ईमान रखता है।

इनसेट में लगायें-

 खुली जमीन खुला आसमान रखते हैं

मीडिया फोरम ऑफ इण्डिया (न्यास) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वाराणसी से प्रकाशित निष्पक्ष समाचार ज्योति हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के जिला सवंाददाता मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी की पत्रकारित में मैराथन दौड़ उसी रफ्तार से 27 जुलाई को 2020 को भी वैसे ही जारी है जैसे 1972 में जब वे पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किये उस समय जब वे युवा थे रही। इनका अपना पराया कोई नही है लेकिन ए सभी के है सभी के लिए है और सभी के काम आते हैं। इन्होंने सैकड़ों युवाओं को हिन्दी पत्रकारिता के क्षेत्र में अभिरूचि रखने वाले युवाओं को प्रशिक्षित कर देश काल और समाज हित में पत्रकारिता करने के लिए कलम पकड़ायी और आज भी यह क्रम जारी है।

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